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शनिवार, 8 दिसंबर 2012

कहानी ए -दस्ता 1500



Not My Pic. But Same these Days 
1500 (एक कॉल सेंटर का नंबर ) से  बातचीत के जरिए हम एक दुसरे के विचारो के नज़दीक आने लगे थे , रुकिए थोडा पीछे चलते है ! वक़्त सुबह 7 बजे का था जब मैंने  अपनी सिफ्ट  शुरू  ही की थी और उन सर्द दिनों की वजह से तबियत भी साथ नहीं दे रही थी बस ट्रिंग 2 शुरु  हो चुकी थी और ये लाइन बोलते बोले उबकाई आने लगी थी के नमस्कार ..... में आपका स्वागत है में आपकी क्या सहायता कर  सकता हु की तभी अचानक  एक धीमी आवाज़ ने मुझे नींद से जगा दिया मैंने वही लाइन  दोहरा दी और सामने से तपाक  से जबाब आया क्या आपकी तबियत ठीक नहीं है, में सन्न  हो गया क्योकि अभी तक कॉल सेंटर में बेहूदा बाते और बेवजह की  शिकायते  ही सुनी थी , सच पूछिए तो रहा नहीं गया और बोल ही दिया सच, की कल रात दोस्त की दावत में खाने और पीने में एसा हुआ है मगर क्या करे नोकरी तो करनी है सो आना पड़ा सामने वाली आवाज़ ने कुछ हिदायते और दबायियो के नाम दिए  पता नहीं किस किस्म की बेहोसी में सब कुछ सुनता रहा और तभी उस आवाज़ ने कहा में दोवारा फोन करुँगी आप का नंबर यही है मैंने हडबडाते हुए कहा नहीं नहीं आप जब दोवारा फोन करेंगी तो पता नहीं आपकी ये सहानुभूति भरी आवाज़ किसी सुने दे क्यों की यहाँ इस नंबर पर 15 लोग बैठते है जो इसी नंबर से जुड़े हुए है पर आपका नंबर मेरी स्क्रीन पर दिख रहा है आप कहे तो में अपना हाल इस नंबर पर बता दूंगा जबाब में हाँ था और मेरी खस्ता हालत इस्फुर्ती में बदल चुकी थी फोन कट होने के बाद मेरी बेवजह की  चिंता बड  चुकी थी की पता नहीं किसी और के पास ये कॉल आता तो मेरा क्या होता ह्हह्हा हहह और मन ही मन अपने मुर्खता वाले उठते प्रश्नों पर हसी भी अ रही थी खेर सिफ्ट  ख़त्म होने के बाद बार 2 में उस नंबर को डायल  करता और काट देता यह सोच कर की पता नहीं कही नंबर गलत हुआ ,या उसने बात नहीं की ,वो शादीसुदा हुई जेसे ख्याल मन में गोते लगा रहे थे खेर हिम्मत करते हुए फोन लगा ही दिया और सामने से मेरे बोलने से पहले ही आवाज़ आई ,,तो आपकी तबियत ठीक हुई या नहीं ,, में फिर से सन्न था मैंने तुरंत पूछ डाला आपको कैसे पता ये मेरा नंबर है उसने हसी में कहा मेरे फोन में जो फोन करता है उसकी तस्वीर अ जाती है तब तक में संभला और हस्ते हुए पुछा बताईए  न कैसे पता चला उसने अपनी आवाज़ को थामते हुए कहा मेरे फोन पर मेरे पापा ,बहन .भाई के सिवा अगर कोई फोन आता है तो में उठाती नहीं हु ठीक वेसा प्रशन दिमाग में आया जेसा आपके दिमाग में अभी आया हुआ होगा की अब कैसे उठा लिया प्रशन जिज्ञसा से भरा था उसने तुरंत कहा मुझे आपके फोन का इन्तजार था इसलिए बस इतना कहते ही में अपने उन सपनो में खो चूका था जो 20 साल के लड़के के होते है उस समय मेरी इतनी ही उम्र रही होगी ! खेर बातो का दौर सुरु हो चूका था और में बात करते 2 और साथ बाइक का कान मरोड़ते हुए अपने रूम पर पहुँच चूका था इस बीच कुछ ईएसआई बाते भी हई जिसने मुझे उदास भी किया और उसकी  तरफ खींचने पर मजबूर कर दिया जेसे उसने कहा की अभी 2 साल पहले ही मेरी माँ का स्वर्वास हुआ है तब से में और पापा ही घर पर रहते है भाई और बहन शहर  में पड़ते है लगा की बस उसके साथ बैठकर ये बाते करू पर अपने आप को रोका और बाते घुमाने लगा ताकि उसे यादो को भूलने में मदद मिले खेर बाते करते 2 देर हो चुकी थी और वो काम करते हुए बाते करती जा रही थी तभी उसके  दरवाजे की घंटी बजी जो मिझे साफ़ सुनाई  दी उसने दरवाज़ा खोला सामने पापा ही होंगे तभी फोन बिना कुछ कहे बिना काट दिया और में तड़प उठा ठीक वेसे ही जेसे किसी मछली को पानी से निकल दिया हो आज ,,इतने सालो बाद भी वो तड़प बरकरार है क्योकि उसकी शादी के ठीक एक दिन पहले उसने कहा था की कभी न कभी हम तहुम्र के लिए मिलेंगे मैंने भरे हुए शब्दों में कहा हां बिलकुल', सालो  की मोहलत मिलने पर मैंने राहत की सांस लेते हुए जवाब दिया।' मेरा यकीन करें,आज भी में अपने उस काल सेंटर की उस मेज पर जाकर बिलकुल वेसी ही इस्फुर्ती महसूस करता हु और एक लम्बी दूरी तय करके में  भी उसके और अपने शहर से दूर अ चूका हु पर आज भी मेरे दिमाग में 1500 नंबर डेड पड़ा हुआ है