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बुधवार, 4 मई 2011

ये शब्द सिर्फ मेरे लिए ...

हमेशा चाहती थी की तुम अपनी बातों जितना ही कुछ बड़ा करके भी दिखाओ
आज तुमने कदम बढाया है मैं खुश हूँ
बड़े बड़े लोगों के शुभ कामना सन्देश मिल रहे हैं तुम्हे
मेरा एक भी नही मिला
तुम्हे लगता होगा कि ये नाइंसाफ़ी है तुम्हारे साथ, हमारी दोस्ती के साथ
पर इन्साफ करने के लिए बस इतना ही कहूँगी कि मेरी दुआओं का असर हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा बिना किसी बधाई सन्देश के भी
अपने अन्दर के उस भरत को बचा के रखना जिसे मैं जानती थी
और हा...
एक और आशीर्वाद तुम्हारे लिए
दुदो नहाओं पूतो फलों
हा हा हा हा हा हा हा
अपनों बच्चों को अपने जैसा बिलकुल मत बनाना
समझे

सोमवार, 2 मई 2011

तुम्हारी आँखे हे या सवाल ?

कुछ उमड़ते हुए बादल
मैंने तुम्हारी आँखों में
देखे हैं
जिस दिन वे बरसेंगे
सारी दुनिया भीग जाएगी
न बरसने देना उन बदलो को 
क्योकि गर वो बरसे तो हम 
भी बच न पाएंगे और जब हम 
न बच पाए तो फिर से बादल
आयेंगे पर बरस न पाएंगे
काश तुम अपने आँखों को 
झुका के बात कर पाती कमसे कम 
दुनिया को बडक्पन का एहसास तो 
होता खेर तुमने जब मिला  ही ली 
आँखे तो अब मुझे अपना  दोस्त तो 
समझो और बता दो दुनिया को 
दिल खोलकर की हा में आँखों से 
नहीं दिल से नहीं जुबान से सवाल कर सकती हु