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सोमवार, 2 मई 2011

तुम्हारी आँखे हे या सवाल ?

कुछ उमड़ते हुए बादल
मैंने तुम्हारी आँखों में
देखे हैं
जिस दिन वे बरसेंगे
सारी दुनिया भीग जाएगी
न बरसने देना उन बदलो को 
क्योकि गर वो बरसे तो हम 
भी बच न पाएंगे और जब हम 
न बच पाए तो फिर से बादल
आयेंगे पर बरस न पाएंगे
काश तुम अपने आँखों को 
झुका के बात कर पाती कमसे कम 
दुनिया को बडक्पन का एहसास तो 
होता खेर तुमने जब मिला  ही ली 
आँखे तो अब मुझे अपना  दोस्त तो 
समझो और बता दो दुनिया को 
दिल खोलकर की हा में आँखों से 
नहीं दिल से नहीं जुबान से सवाल कर सकती हु


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