इन गलियों को लिखने का मकसद कुछ खास है क्योकि ये गलिया ले जाती है आपको उन पक्की सडको पर जहा आप भूल जाते है इन गलियों को और न कहिएगा की यही सब लिखते रहते हो .यही सब तो है वो गलियां............अब उसके शहर में ठहरें के कूच कर जाएँ
फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
रविवार, 17 जुलाई 2011
क़ातिल
क़ातिल ने किस सफ़ाई से धोई है आस्तीन , वो जानता नही कि लहू बोलता भी है
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