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सोमवार, 9 अगस्त 2010

रास्ट्रीये एकीकरण एक समस्या ?

मारा देश बिभिन्न धर्म ,जाती, भाषा , संस्कृति बाला देश है जिसे हम अगर विविधताओं वाला देश कहे तो गलत नहीं होगा !
तभी तो हर समूह के अपने हित और अपनी समस्याये अलग अलग है , और भारतीये राजनीत की बात करे तो इन  हितो के बीच एक समानता बनना भारतीये राजनीत की गले की हड्डी बना हुआ है ! मै बात कर रहा हु  रास्ट्रीये एकीकरण की जिसका लोगो ने  गलत मतलब निकालकर यह समझ लिया है ,की सारी विवधताओ को ख़त्म करके पूरे देश मै एक धर्म और एक भाषा लागू  कर दी जाए !जबकि इसका मतलब जाती ,धर्म ,भाषा ,जेसी तमाम भिन्नताओ को इस तरह बनाये रखना चाहिए जिससे देश का अस्तित्ब  खतरे मै न रहे ,और दूसरी और यह भी ध्यान रखना होगा की कोई व्यक्ति या समूह अपने लाभ और अपने समूह हित के लिए  रास्ट्रीये हितो की  इक्छा  न कर पाए ,जो इस समय देश मै तेज़ी से चल रहा है ! आरक्छड के नाम हर समूह एक लंबा आराम और नाम चाह रहा है  यह लोग  रास्ट्रीये एकीकरण को ताक पर रखकर यह भूल गए है की  रास्ट्रीये एकीकरण का अर्थ रास्ट्र का हित है जो व्यक्ति ,समूह हितो से ऊपर है ! हमारे देश को आज़ाद हुए 63  साल होने जा रहे है पर आज़ादी के ठीक पहले की बात करे तो स्वत्तन्त्रता आन्दोलन के समय पूरे देश मै एकता का जो वातावरण था वह इससे पहले और न अभी तक देखने को नहीं मिला सभी का एक लक्छ्ये था आज़ादी जिसके लिए सभी धर्मो ,जाती ,छेत्रों के लोग एक होकर अपने मतभेदों को भूल कर मर ,मिटने के लिए तेयार हो गए थे !पर आज इसका ठीक उल्टा देखने को मिलता है देश की राजनीत ने  व्यक्तिगत स्वार्थ और समूह स्वार्थ को बढ़ावा दे दिया है इसका कारण यही है की स्वतंत्रता के बाद जो राजनीत व्यबस्था की गई उसकी विशेषता राजनीत तंत्र मै जन साधारण का सक्रिय रूप से भागीदार होना था !और यह समस्या इतनी बढ़ गई है की आज हम एकता और अखंडता को बनाए रखने की बात करते है !कारण यही है की रास्ट्रिये एकीकरण के न हो पाने मै बहुत सारे तत्ब है जो बाधक है जैसे साम्प्र्दयिकता ,जातिवाद ,भाषावाद ,छेत्रियेवाद आदि अगर हम साम्प्र्दयिकता की वात करे तो एकीकरण की समस्या दो धर्मो दो जातियों के बीच प्यार बढाने से हल नहीं होगी बल्कि उन धर्मो के अन्दर पाए जाने वाले छोटे समूह को एक करने से हल होगी वह इसलिए क्योकि हमारे देश मै सबसे बढ़ा अल्पसंख्यक समूह मुसलमानों का है और आज के दौर मै हिन्दू और मुसलमानों मै कई मुद्दों को लेकर तनाब रहता है जिससे कई जगह दंगे हो रहे है जिससे जान माल की हानि हो राही है !और देखा जाए तो जाती दूसरा मुख्य तत्ब है जिससे समाज मै अनेक समूह हो गए है और नोबत यहाँ तक आगे है की अब संघर्ष छोटी जाती और बड़ी मै न होकर हर जाती मै हो गया है ,क्योकि सबकी अलग -अलग दुनिया है और सब मै होड़ लगी है की एसे दौर की राजनीत मै उन्हें कितना लाभ मिल सकता है सोचने के बात है लम्ब्बा समय बीतने के बाद भी ऊँच नींच भेद भाब हमारे बीच बैठा हुस रहा है ! 

1 टिप्पणी:

  1. छोड़ो यार, बहुत बड़े मसले हैं। सब अपने आप को सुधार ले तो फिर समस्या ही क्या है। दुख तो इस बात का है कि लोग अपने आपको दिखाते कितना अलग हैं और अंदर से होते क्या हैं...।

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