मौसम का हाथ पकडे चल रहे थे ,उम्र के मौसम !
लो आगया फिर एक मौसम ,आज कहता हु वही बात जो
तुहारे न होने पर भी तुमहें सुनाई दे ! अकेला तुम्हारा ही नाम था
इस खत्म होते सफरनामे मै और बड़े बदनाम थे तुम्हारे नाम से गुजरे ज़माने मै
पता नहीं इस शहर मै तुम कब से नहीं आई ! आज मै यहाँ आया तो तुम्हारी बहुत
याद आई कभी हमने यहाँ जो प्यार बोया था उसकी जड़े बादियो तक थी ,पर फेलाब पहाड़ो तक था
हमने यहाँ दौबारा आने की उम्मीद की थी प्यार दोहराने का हमारा भी मन था !

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