इन गलियों को लिखने का मकसद कुछ खास है क्योकि ये गलिया ले जाती है आपको उन पक्की सडको पर जहा आप भूल जाते है इन गलियों को और न कहिएगा की यही सब लिखते रहते हो .यही सब तो है वो गलियां............अब उसके शहर में ठहरें के कूच कर जाएँ
फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
सोमवार, 22 नवंबर 2010
तन्हाई
तुम्हारे जाने के बाद टुटा तो नहीं ,बिखर सा गया हु गर टूट जाता तो लोग टुकड़े समेट कर जोड़ने में लग जाते !पर मैंने बिखरना ही बेहतर समझा ताकि समेट ने की गुंजाईश ही न रहे !
हर शब्द में गहराई, बहुत ही बेहतरीन प्रस्तुति ।
जवाब देंहटाएं... bahut khoob !!!
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