हर ख़ुशी है ,लोगों के दामन में पर
एक हसी के लिए वक़्त नहीं है !
दिन रात डूबती हुई दुनिया में
जिंदगी के लिए ही वक़्त नहीं है !
माँ की लोरी का तो एहसास है ,पर
माँ को माँ कहने का वक़्त नहीं है !
सारे रिश्तो को हम मार चुके है
पर उन्हें दफ़नाने का वक़्त नहीं है
सारे नाम दिमाग में है ,पर उन्हें
पुकारने का वक़्त नहीं है !
गेरो की क्या बात करे , जब अपनों
के लिए वक़्त नहीं है ! आँखों मै हे नींद
बड़ी पर जिसकी गोद मै सर रखकर सोये हम
उसके पास वक़्त नहीं है !

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