इन गलियों को लिखने का मकसद कुछ खास है क्योकि ये गलिया ले जाती है आपको उन पक्की सडको पर जहा आप भूल जाते है इन गलियों को और न कहिएगा की यही सब लिखते रहते हो .यही सब तो है वो गलियां............अब उसके शहर में ठहरें के कूच कर जाएँ
फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
शुक्रवार, 31 दिसंबर 2010
स्वागतम 2011 ...
ईश्वर आपकी समस्याओ को उतनी देर में सुलझाये जितनी देर तक आपके संकल्प रहते है जय हो ,शुभ हो मंगलमय हो ........
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