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शनिवार, 19 जून 2010

समझ से परे ?

मुझे शब्दों मै बांधने की कोशिस करके देखि उन लोगो
ने जिनके पास उनके मतलब दूर ,दूर तक नहीं थे !
फिर राग अलाप लिया दोस्ती का जो कभी शब्दों के
ऊपर समझी ही नही थी फिर वास्ता दिया वफ़ा का
जिससे वास्ता कोसो दूर तक ना था थक हार कर खीच
दी चंद लाइने कागज पर और खुसफेमियो मै होकर रात गुजार दी
की अब सब ठीक हो गया है !जैसे किसी सरकारी डाक्टर ने किसी गरीब को
ढाढस बंधा दी हो की अब तुम कुछ दिन और जी लोगे !

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