Text selection Lock by Hindi Blog Tips

गुरुवार, 24 जून 2010

शरारत या समझदारी

बात उस घर की है जिसमे सात बच्चे रहा करते थे जिसमे से एक लड़की और ६ लड़के थे   सभी मै बड़ी दोस्ती भी थी और झगड़े भी थे पर इन सब के बाबजूद एक बात समान थी की सभी अपने ,अपने काम को समय पर पूरा कर लेते थे इनमे से एक बच्चा इतना  शरारती था की जब भी घर के बड़े कही बहार जाते तो उस शरारती की जिम्मेदारी बाकी बच्चो को सोप देते बच्चा शरारती था पर काम का था या नहीं ये तो घर के बड़े ही जानते थे एक दिन की बात है ,कुछ दिनों के लिए घर के बड़े लोग शहर से बहार गए और जाते वक़्त सभी बच्चो को बुलाया और कहा हम लोग कुछ दिन के लिए बहार जा रहे है पीछे से घर का ध्यान रखना और उस शरारती का भी जो इस वक़्त तुम लोगो के बीच नहीं है ,जब वो आये तो उसे यह बता देना की उसे घर से बहार तब तक नहीं जाना है जब हम आ नहीं जाते और इतना कहकर वो चलते बने उनके जाने के बाद बाकी बच्चे आपस मै बात कर ने लगे की अगर उसे सारा दिन घर मै बिठा रखेंगे तो जो घर के बहार के काम कौन करेगा जैसे सब्जी लाना बिल जमा करना और भी कई सारे काम थे जो इस शरारती की जिम्मेदारी मै शामिल थे अब सभी उस शरारती के आने की राह तक ने लगे जैसे ही वो आया बाकी बच्चो मै से एक बच्चा बदक्पन वाले अंदाज़ मै बोला तुम्हे कही नहीं जाना है सिर्फ घर पर ही रहना है ठीक है बच्चे ने मुस्कुराकर कहा की इसका मतलब मै सिर्फ आराम करूँगा बाकियों ने एक स्वर मै कहा हां सिर्फ एक को छोड़कर और वो थी उस घर की बेटी जो जानती थी की घर कैसे चलाया जाता है और अगर वो ये सब बाकियों को समझाएगी तो उसका इसका उत्तर क्या मिलेगा इसी लिए शांत ही रहा करती थी !दिन शुरु हुआ शरारती जैसे ही नींद से जगा सभी आपस मै लड़ रहे थे उसने पूछा लड़ क्यों रहे हो तो उत्तर मिला मै इस से कब से कह रहा हु  घर मै दूध नहीं है ले आओ तो जा ही नहीं रहा कहता है ये मेरा काम नहीं है मेरा काम चाय बनाना है मै सिर्फ चाय बनाऊंगा ,फिर दुसरे से पूछा तुम क्यों लड़ रहे हो  , तो उसने कहा की मै कब से इससे कह रहा हु बिल जमा करवा दे बिजली नहीं है ये जा ही नहीं रहा ,शरारती ने कहा मै तुम लोगो के झगड़े को पलक झपकते खत्म कर सकता हु सब ने कहा कैसे उसने कहा मै ये सारे काम कर दूंगा बस तुम ये सब किसी से कहना मत सभी ने सोचा और तुरंत हा कर दी और उन कामो मै लग गए जो घर के बड़ो की मोजूदगी मै कर नहीं पाते थे और शरारती को उस दिन इस बात का एहसास हो गया की हम आजादी मिलने के बाद दरअसल गुलाम हो और साथ मै जिम्मेदारिया भी बड़ जाती है और शायद घर के बड़े भी ये बात कही ना कही जानते थे !

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें