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गुरुवार, 1 अप्रैल 2010

ये रात का इकरार


ये रात की तन्हाई का आलम
और ज़हन मे तुम्हारे ख्यालों का मौसम
दिल मे तुम्हारी यादें और आँखों मे तुम्हारे ख्वाबना नींद आती है ,ना आँख खोलने को जी चाहता है,डर लगता हैकहीं टूट ना जाएवो ख्वाब, जो अरसे से संजोया है…बिखर ना जाए वो यादों के मोती ,जिन्हे दिल की गहराइयों मे पिरोया है…टूट ना जाए ख्यालों का सिलसिला जिसे पल-पल जोड़कर दिल मे सजोया है…बीत ना जाए ये तन्हाई का मौसमजिसने तुम्हारे प्यार की रिमझिम बरसात मे भिगोया है…कि आ जाओ हम इकरार करते हैं……….आज कहते हैं कि हम तुमसे प्यार करते हैं…..तुमसे प्यार करते है……..

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