इन गलियों को लिखने का मकसद कुछ खास है क्योकि ये गलिया ले जाती है आपको उन पक्की सडको पर जहा आप भूल जाते है इन गलियों को और न कहिएगा की यही सब लिखते रहते हो .यही सब तो है वो गलियां............अब उसके शहर में ठहरें के कूच कर जाएँ फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
रविवार, 4 अप्रैल 2010
शादी के तीनों नियम, पारम्परिक रूप से, संक्षेप में इस प्रकार हैं:
सचिन श्रीवास्तव
1. यदि बीवी हंस रही है, तो हंसती ही रहेगी और अगर रो रही है तो रोती ही रहेगी जब तक कि टीवी पर चलने वाला सीरियल खत्म न हो जाए।
2. बीवी के खुश रहने की दर मियां के दुखी होने के वियुत्क्रमानुपाती होती है और उसकी दिशा दुख के ठीक उलट होती है।
3. प्रत्येक गुजरते दिन के साथ मियां के अधिकारों में कटौती होती जाती है, जो बीवी की ओर स्थानांतरित होते रहते हैं।
सभी नियम टेस्टेड पिछले एक महीने में बिना किसी अपवाद के।
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ek mahine ke anubhav ke adhar par itna paukhta vishleshan jaldbaji hogi....vaqt ke sath chije badlati hai
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