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सोमवार, 5 अप्रैल 2010

प्यासा




ये कूचे ये नीलामघर दिलक़शी के

ये लुटते हुए कारवां ज़िंदगी के

कहां हैं कहां हैं मुहाफ़िज़ ख़ुदी के

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





ये पुरपेंच गलियां ये बेख़्वाब बाज़ार

ये गुमनाम राही ये सिक्कों की झंकार

ये इस्मत के सौदे ये सौदों पे तकरार

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





तअफ्फुन से पुरनीम रौशन ये गलियां

ये मसली हुई अधखिली ज़र्द कलियां

ये बिकती हुई खोखली रंगरलियां

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





वो उजले दरीचों में पायल की छनछन

तऩफ्फ़ुस की उलझन पे तबले की धनधन

ये बेरूह कमरों में खांसी की धनधन

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





ये गूंजे हुए कहकहे रास्तों पर

ये चारों तरफ भीड़ सी खिड़कियों पर

ये आवाज़ें खिंचते हुए आंचलों पर

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





ये फूलों के गजरे ये पीकों के छींटे

ये बेबाक़ नज़रें ये गुस्ताख़ फ़िक़रे

ये ढलके बदन और ये मदक़ूक़ चेहरे

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





ये भूखी निगाहें हसीनों की जानिब

ये बढ़ते हुए हाथ सीनों की जानिब

लपकते हुए पांव ज़ीनों की जानिब

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





यहां पीर भी आ चुके हैं जवां भी

तनूमंद बेटे भी अब्बा मियां भी

ये बीवी भी है और बहन भी है मां भी

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





मदद चाहती है ये हव्वा की बेटी

यशोदा की हमजिंस राधा की बेटी

पयंबर की उम्मत ज़ुलेख़ा की बेटी

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..





ज़रा मुल्क़ के रहबरों को बुलाओ

ये कूचे ये गलियां ये मंज़र दिखाओ

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ को लाओ

सना-ख़्वाने-तक़दीसे-मशरिक़ कहां हैं..

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