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शुक्रवार, 2 अप्रैल 2010

बद से बदतर हालत

ओधोगीकरण ने भले ही हमें आगे लाके खड़ा कर दिया है लेकिन इसी ओधोगीकर ने किसानो के हालत को बद से बदतर कर दिया है अगर हम बात करे दिल्ली से सटे आस पास के इलाको की तो शायद पता चलेगा की कितनी तेजी के साथ किसानो के हाथो से खेती योग्य ज़मीन फिसलती जा रही है और जहा तक मेरा मानना है की ये आने वाले गहरे संकट का संकेत है ,जिसके दूरगामी परिणाम हमें साफ़ नहीं दिखाई दे रहे है अगर इन सबका जिम्मेदार ठहराना है तो .बढ़ते उधोग जो तेजी से बढ़ते हुए जमीनों को निगलते जा रहे है या फिर वो किसान जो रातो रात करोडपति बनने की चाह मै अपनी खेतिहर ज़मीन बेचने पर बाध्य हो रहा है ....

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