इन गलियों को लिखने का मकसद कुछ खास है क्योकि ये गलिया ले जाती है आपको उन पक्की सडको पर जहा आप भूल जाते है इन गलियों को और न कहिएगा की यही सब लिखते रहते हो .यही सब तो है वो गलियां............अब उसके शहर में ठहरें के कूच कर जाएँ फ़राज़ आओ सितारे सफ़र के देखते हैं
शनिवार, 3 अप्रैल 2010
नजरिया
एक पुराना किस्सा है , एक बाग़ मै कुछ लोग एक गुलाब के फूल को देखकर लगातार बहस मै लगे हुए थे कोई कहता ये थोडा सुखा सा है कोई कहता है थोडा और बड़ा होता तो जादा खूब सूरत दिखाई देता, तो कोई उसकी सुन्दरता का कायल हुआ जा रहा था तभी बहा ओसो का आना हुआ और उन्होंने उस गुलाब को देखकर कहा की आप लोग यह बात अपने अपने नजरिये से कह रहे है दरअसल गुलाब का फूल तो बही रहेगा जो उसकी तासीर मै है तब सभी लोग समझ गए की ओसो क्या कहना चाह रहे है दरअसल गुलाब की तासीर सुन्दरता है तो बह लाख आलोचनाओ के बाद भी बही रहेगा जहा बह है ! और यह नजरिया आपको कही भी दिखाई दे सकता है बशर्ते आप मै दिमाग होना जरुरी है अभी हरिद्वार मै कुम्भ चल रहा है और बहा लाखो लोग प्रति दिन स्नान के लिए जा रहे है .हसी के सहंसा राजू श्रीवास्तव भी बहा पहुचे और बहा से कुछ इस तरह का नजरिया लेकर आये ,चारो तरफ लोग नहा रहे है कोई धोती मै कोई कच्छा पहने हए ,सभी को ठण्ड लग रही है लेकिन मुह पर एक ही नाम जय गंगा मैया तभी एक आदमी अपने आप को सँभालते हुए आधा अन्दर आधा बहार और स्नान के बाद किसी नागा साधू को देखता तभी उसकी नजर एक आधे नागे पर पड़ती है और तुरंत बह उनके पेरो मै गिर जाता है और कहता है बाबा असीरबाद दीजिये नागा कहता अरे हट यहाँ से नहीं बाबा आसीरबाद दीजिये अरे हट जा मै नागा नहीं हु मेरी टआबिल कोई उठा कर ले गया है तो कुछ इस तरह भी हो जाता है और एक नजरिया बन जाता है
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