धुंद मै अन्धकार मै पर्दों में दिवार मै
कही छिपता है , सच कभी
झूट के अम्बार मै !
सच को सच से मिलाते है
कुछ य़ू झूट से निगाह मिलाते है
हम ,की डरते नहीं कुछ भी अंजाम हो
अब फरेब से परदे उठाते है हम !
किसी को तो करना ही होगा कुछ
ये सोच के एक कदम अब उठाते है हम ,
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